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वह ऊष्मा हैं, ऊर्जा हैं , प्रकर्ति हैं क्युकी वही तो आधी दुनिया और पूरी स्त्री हैं।

स्त्री किसी पहचान की मोहताज़ नहीं , जन्म से ही हज़ारो तकलीफो से गुजरने के बाद भी चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखती हैं। अपने हर सपने से पहले वो अपनों के सपने पुरे हो ऐसी भगवान् से प्रार्थना करती हैं।

स्त्री का सम्मान हमारी सभ्यता को दर्शाता हैं , हमारे ग्रंथो में भी स्त्री को पहला और देवी का दर्ज़ा दिया गया हैं। अगर हम स्त्री का सम्मान करेंगे तो घर में धन , वैभव , हर्ष हमेशा बना रहेगा।

YRR

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